कविता
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"प्रयोग के आदी" हमने शौक-शौक में यूं तो की थीं हत्याएं बहुत...
आज मारने पर उतारू हो गए,
प्रेम नाम के पंछी को....
और इस तरह,
दबाते गए---दबाते गए---दबाते गए गला....
____ आज अंतिम सांसें गिन रहा है
उठा के आईसीयू में डालें ..
या दें एक और झटका,,,,,
और टूट जाए सांसों की लड़ी.......!!!
बहुत से बहुत एक हत्या का इल्जाम और सही........@!!!! ??
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"प्रयोग के आदी" हमने शौक-शौक में यूं तो की थीं हत्याएं बहुत...
आज मारने पर उतारू हो गए,
प्रेम नाम के पंछी को....
और इस तरह,
दबाते गए---दबाते गए---दबाते गए गला....
____ आज अंतिम सांसें गिन रहा है
उठा के आईसीयू में डालें ..
या दें एक और झटका,,,,,
और टूट जाए सांसों की लड़ी.......!!!
बहुत से बहुत एक हत्या का इल्जाम और सही........@!!!! ??
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