जलते रहो
गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना, सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Monday, December 31, 2012
किसको कोसूं और किस-किससे कहूं.....
जब रोज फूट जाता है मेरी कल्पनाओं का गुबार।।
Thursday, December 13, 2012
अपने दुखों को गर्मजोशी से मनाती रही इस उम्मीद में.................
कि शायद इक दिन शायर हो जाऊं.....।।
लीडर और डीलर में बस शब्दों का हेर-फेर है, काम तो दोनों का ही एक जैसा है।
मेरे जीने को बस एक तेरा खयाल ही काफी है...........मेरे मालिक..
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)