Wednesday, April 9, 2014

ओ ! शमी के वृक्ष...
..आओ..
चलो एक खेल खेलते हैं..
फट पडो तुम..!
और खुद को फाड़ देती हूं मैं....
झौंक देती हूूं मैं खुद को तुम्हारी आग में --
और भस्म हो जाओ मेरी में तुम....!!!!
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