Wednesday, April 9, 2014

गज़ल
--------------

वक्त बेवक्त मुझे याद आया न करो
इस कदर मेरी जाना सताया न करो..।।

बन के मरहम छू लेते हो मुझे
मेरे जख्मों को यूं और दुखाया न करो..।।

दो घड़ी दिन में हंसा के मुझको
इस कदर रात भर रुलाया न करो...।।

तेज कदमों से चल पडूं जब मैं
यूं धीमे से मुझे बुलाया न करो..।।

है अगर दिल में तो कहते क्यों नहीं
प्यार को इस तरह छुपाया न करो...।।

ये मेरी जिंदगी है कोई गीत नहीं
गाके दुनिया को इसे सुनाया न करो..।।

No comments:

Post a Comment