गज़ल
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वक्त बेवक्त मुझे याद आया न करो
इस कदर मेरी जाना सताया न करो..।।
बन के मरहम छू लेते हो मुझे
मेरे जख्मों को यूं और दुखाया न करो..।।
दो घड़ी दिन में हंसा के मुझको
इस कदर रात भर रुलाया न करो...।।
तेज कदमों से चल पडूं जब मैं
यूं धीमे से मुझे बुलाया न करो..।।
है अगर दिल में तो कहते क्यों नहीं
प्यार को इस तरह छुपाया न करो...।।
ये मेरी जिंदगी है कोई गीत नहीं
गाके दुनिया को इसे सुनाया न करो..।।
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वक्त बेवक्त मुझे याद आया न करो
इस कदर मेरी जाना सताया न करो..।।
बन के मरहम छू लेते हो मुझे
मेरे जख्मों को यूं और दुखाया न करो..।।
दो घड़ी दिन में हंसा के मुझको
इस कदर रात भर रुलाया न करो...।।
तेज कदमों से चल पडूं जब मैं
यूं धीमे से मुझे बुलाया न करो..।।
है अगर दिल में तो कहते क्यों नहीं
प्यार को इस तरह छुपाया न करो...।।
ये मेरी जिंदगी है कोई गीत नहीं
गाके दुनिया को इसे सुनाया न करो..।।
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