Saturday, October 13, 2018

प्यार है न प्यार का नामो निशाँ
ये समझिये काटना है वक्त बस

5 sept
मेरा जी भर गया है अब यहां से
मुझे ले जाओ कोई इस जहाँ से

7 sept 
अस्पताल उग गए हैं कदमों पर
इलाज़ का मीलों तक पता नहीं

10 sept 
तुम्हारे बिन, कि जैसे ज़िंदगी में रंग सौ,
फिर उनपे पोत दी हो तल्ख़ कालिख़ वक़्त ने!


14 sept
बोझ सर पे है दुआओं का बड़ा
अब मुझे बस बद्दुआयें दीजिए!

15 sept 
मुझे छेड़ो नहीं इस वक़्त यारों,
ज़रा चुप भी रहो, मैं प्यार में हूँ.

16 sept
मुझे महसूस तुझे करने दे,
आ ज़रा बैठ सिरहाने मेरे.

17 sept
मैं'ने पकड़ा हाथ तेरा नींद में चलते हुए
और फिर ठोकर भी खाई नींद में चलते हुए.

हाथ छोड़ा तूने, मेरा दम निकलकर आ गया,
और फिर फूटी रुलाई नींद में चलते हुए.

एक ही तो बात कहनी थी मुझे तुझसे मगर,
बात जाने क्या सुनाई? नींद में चलते हुए.

मैं ही कन्धे पर थी, मैं ही रो रही थी फर्श पर
मैं'ने ही अर्थी उठाई नींद में चलते हुए.

होश में जो भूल बैठी थी 'प्रिया' फिर क्यों भला,
याद आई आशनाई नींद में चलते हुए?

18 sept
ज़िस्म के धंधे से होगी इज़्ज़त ख़राब!
प्यार का नाम दो और करिश्मा देखो.

18 sept 
उसका तज़ुर्बा है कि मैं लौटूंगी,
मेरे तरीक़े में नहीं वापस आना.

19 sept
उसको रखना था अहम एक तरफ़,
कुछ तो मुझ को भी नरम होना था!

sept
कल तलक़ थे आशना पर आज हैं हम अज़नबी,
और फिर दोनों ही कल तक यार मर जाएंगे हम.

प्यार की कुछ, बात कर ले, छोड़ भी दे, रंजिशें,
ये भी सच है, लौट कर, वापस नहीं आएंगे हम!

20 sept
नौकरी दिन भर करें फिर रात का है हाल ये,
'एक झटका नींद का और एक तेरी याद का'

21 sept
वही हर रोज़ की रोटी जुटाना,खाना,सो जाना,
बता भी दो कोई इस ज़िन्दगी में क्या रखा है?

22 sept
ऐ बारिश! मिरे इंतिज़ार को न धो
आने वाला है जो उसे आ जाने दे

22 sept
मैं एक हरियल पेड़ नीम का,
तू भादौं की रिमझिम बारिश!

25 sept
तुझसे लड़ना ओ झगड़ना भी है
तुझी पे जान देनी है मरना भी है

25 sept
कत्थई आँखों वाली लड़की ने मुझको बतलाया है,
'एक गुलाबी होटों वाले लड़के पे दिल आया है'

26 sept
ख़त लौटाने तो आया है तू, पर
मेरे जज़्बात भी वापस कर जा.

27 sept
मुझे तुम छोड़कर जा तो रहे हो,
कसम है नाम मत लेना दोबारा!

28 sept
वस्‍ल का पांव लड़खड़ाया था,
हिज्र ने रख दिया हाथ अपना!

29 sept
न कोई ख़्वाहिश न ख़ाब कोई
मैं बस किसी की तला'श में हूँ.

वही जो मुझमें है आधा-आधा
है, को'ई दूजा या मैं-ही-मैं हूँ.

बड़ी ही बेकल है सांस, शायद
जो मिट न पाई वो प्यास मैं हूँ!

मुझे भी बतला दो ऐ ज़हीनों
कि मैं हूँ ज़िंदा या लाश मैं हूँ?

कुचल ही जाना है भाग्य मेरा
हां वो ही शायद, पलाश मैं हूँ!

किसी तरसते को जाके दे दो.
भरा हुआ एक गिलास मैं हूँ!

1 oct  
शाम ढल रही है क्या देखो तो?
याद फिर मुझे आ रहा है कोई!

3 oct
हमको लूटा गया था करीने से
नाम रक्खा गया प्यार उस का.

4 oct
अब जो ढूँढे तो ढूँढा कर तू
दर से तिरे लौट आया हूँ मैं!

5 oct
लोग भाग जाते हैं 'गाँवों' से,
'शहर' लोगों को भगा देते हैं.

8 oct
उसको चाहने का सबब ये भी है जनाब
न प्याज न लहसुन, न सिगरेट न शराब.

2 oct
घुसा देना ये ख़ंजर पीठ में तुम
मुझे बस फेर लेने दो ज़रा मुंह.

9 oct
याद तेरी रहमत कर बस हंस पड़ते हैं,
लोग हमें जब सनकी-पागल कहते हैं.

11 oct
कुछ तो तबाही गुज़री होगी उसपर भी,
तू ही बता कोई पागल होना चाहता है?

11 oct
भींच कर होंठ रो रहा शिकवा,
ये तअल्लुक़ की मौत है शाइद

12 oct
न तो दर्द ही है ये हिज्र का, न ही वस्ल की तीख़ी तलब,
फिर है भला मेरे दिल में क्या, ये जो उठ रहा है ग़ुबार सा!

12 oct