Wednesday, April 9, 2014

देखो मेरी आंखों में
खारी लहरें उफन रही हैं..
व्याकुल हूं..
तड़प रही हूं..
बदहवाश हो दौड़ रही हूं...
सुनो मेरा क्रंदन, ये रुदन, ये विलाप..ये चीत्कार....
नहीं-नहीं मैं कोई प्रेमिका नहीं हूं...न ही पति के शव से लिपटी विधवा..
मैं तो बस तुम्हें ढूंढ रही हूं..फूट-फूटकर रो रही हूं.
बिलख रही हूं..
ऐसे...
" बिलखती है जैसे खोऐ हुए बच्चे की मां "......

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