Saturday, October 13, 2018

प्यार है न प्यार का नामो निशाँ
ये समझिये काटना है वक्त बस

5 sept
मेरा जी भर गया है अब यहां से
मुझे ले जाओ कोई इस जहाँ से

7 sept 
अस्पताल उग गए हैं कदमों पर
इलाज़ का मीलों तक पता नहीं

10 sept 
तुम्हारे बिन, कि जैसे ज़िंदगी में रंग सौ,
फिर उनपे पोत दी हो तल्ख़ कालिख़ वक़्त ने!


14 sept
बोझ सर पे है दुआओं का बड़ा
अब मुझे बस बद्दुआयें दीजिए!

15 sept 
मुझे छेड़ो नहीं इस वक़्त यारों,
ज़रा चुप भी रहो, मैं प्यार में हूँ.

16 sept
मुझे महसूस तुझे करने दे,
आ ज़रा बैठ सिरहाने मेरे.

17 sept