Saturday, October 13, 2018

प्यार है न प्यार का नामो निशाँ
ये समझिये काटना है वक्त बस

5 sept
मेरा जी भर गया है अब यहां से
मुझे ले जाओ कोई इस जहाँ से

7 sept 
अस्पताल उग गए हैं कदमों पर
इलाज़ का मीलों तक पता नहीं

10 sept 
तुम्हारे बिन, कि जैसे ज़िंदगी में रंग सौ,
फिर उनपे पोत दी हो तल्ख़ कालिख़ वक़्त ने!


14 sept
बोझ सर पे है दुआओं का बड़ा
अब मुझे बस बद्दुआयें दीजिए!

15 sept 
मुझे छेड़ो नहीं इस वक़्त यारों,
ज़रा चुप भी रहो, मैं प्यार में हूँ.

16 sept
मुझे महसूस तुझे करने दे,
आ ज़रा बैठ सिरहाने मेरे.

17 sept
मैं'ने पकड़ा हाथ तेरा नींद में चलते हुए
और फिर ठोकर भी खाई नींद में चलते हुए.

हाथ छोड़ा तूने, मेरा दम निकलकर आ गया,
और फिर फूटी रुलाई नींद में चलते हुए.

एक ही तो बात कहनी थी मुझे तुझसे मगर,
बात जाने क्या सुनाई? नींद में चलते हुए.

मैं ही कन्धे पर थी, मैं ही रो रही थी फर्श पर
मैं'ने ही अर्थी उठाई नींद में चलते हुए.

होश में जो भूल बैठी थी 'प्रिया' फिर क्यों भला,
याद आई आशनाई नींद में चलते हुए?

18 sept
ज़िस्म के धंधे से होगी इज़्ज़त ख़राब!
प्यार का नाम दो और करिश्मा देखो.

18 sept 
उसका तज़ुर्बा है कि मैं लौटूंगी,
मेरे तरीक़े में नहीं वापस आना.

19 sept
उसको रखना था अहम एक तरफ़,
कुछ तो मुझ को भी नरम होना था!

sept
कल तलक़ थे आशना पर आज हैं हम अज़नबी,
और फिर दोनों ही कल तक यार मर जाएंगे हम.

प्यार की कुछ, बात कर ले, छोड़ भी दे, रंजिशें,
ये भी सच है, लौट कर, वापस नहीं आएंगे हम!

20 sept
नौकरी दिन भर करें फिर रात का है हाल ये,
'एक झटका नींद का और एक तेरी याद का'

21 sept
वही हर रोज़ की रोटी जुटाना,खाना,सो जाना,
बता भी दो कोई इस ज़िन्दगी में क्या रखा है?

22 sept
ऐ बारिश! मिरे इंतिज़ार को न धो
आने वाला है जो उसे आ जाने दे

22 sept
मैं एक हरियल पेड़ नीम का,
तू भादौं की रिमझिम बारिश!

25 sept
तुझसे लड़ना ओ झगड़ना भी है
तुझी पे जान देनी है मरना भी है

25 sept
कत्थई आँखों वाली लड़की ने मुझको बतलाया है,
'एक गुलाबी होटों वाले लड़के पे दिल आया है'

26 sept
ख़त लौटाने तो आया है तू, पर
मेरे जज़्बात भी वापस कर जा.

27 sept
मुझे तुम छोड़कर जा तो रहे हो,
कसम है नाम मत लेना दोबारा!

28 sept
वस्‍ल का पांव लड़खड़ाया था,
हिज्र ने रख दिया हाथ अपना!

29 sept
न कोई ख़्वाहिश न ख़ाब कोई
मैं बस किसी की तला'श में हूँ.

वही जो मुझमें है आधा-आधा
है, को'ई दूजा या मैं-ही-मैं हूँ.

बड़ी ही बेकल है सांस, शायद
जो मिट न पाई वो प्यास मैं हूँ!

मुझे भी बतला दो ऐ ज़हीनों
कि मैं हूँ ज़िंदा या लाश मैं हूँ?

कुचल ही जाना है भाग्य मेरा
हां वो ही शायद, पलाश मैं हूँ!

किसी तरसते को जाके दे दो.
भरा हुआ एक गिलास मैं हूँ!

1 oct  
शाम ढल रही है क्या देखो तो?
याद फिर मुझे आ रहा है कोई!

3 oct
हमको लूटा गया था करीने से
नाम रक्खा गया प्यार उस का.

4 oct
अब जो ढूँढे तो ढूँढा कर तू
दर से तिरे लौट आया हूँ मैं!

5 oct
लोग भाग जाते हैं 'गाँवों' से,
'शहर' लोगों को भगा देते हैं.

8 oct
उसको चाहने का सबब ये भी है जनाब
न प्याज न लहसुन, न सिगरेट न शराब.

2 oct
घुसा देना ये ख़ंजर पीठ में तुम
मुझे बस फेर लेने दो ज़रा मुंह.

9 oct
याद तेरी रहमत कर बस हंस पड़ते हैं,
लोग हमें जब सनकी-पागल कहते हैं.

11 oct
कुछ तो तबाही गुज़री होगी उसपर भी,
तू ही बता कोई पागल होना चाहता है?

11 oct
भींच कर होंठ रो रहा शिकवा,
ये तअल्लुक़ की मौत है शाइद

12 oct
न तो दर्द ही है ये हिज्र का, न ही वस्ल की तीख़ी तलब,
फिर है भला मेरे दिल में क्या, ये जो उठ रहा है ग़ुबार सा!

12 oct

Wednesday, September 5, 2018

ज़िन्दगी यूँ तो कई बार मिली
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.

ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.

चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.

वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?

बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.

शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.

22-08-2018
आने-जाने से होती थी तोड़-फोड़ बहुत !
सो हमने दिल में एक दरवाजा बना दिया.

23-08-2018
बच्‍चे सी ज़‍िद हैं उसकी सब,
मुझे मॉं सा सब्र रखना होगा.


24-08-2018
टीस वही, चीख़ ओ अज़ाब वही
फिर कुरेदा है किसी ने घाव वही

24-08-2018
अपने हिस्से की, रोटियां भी, छोड़ दीं मैंने,
जाने क्यूँ मुझसे प्रिया फिर भी ख़फ़ा है दुनिया.

27-08-2018
पहले इश्‍क़ो-हुस्‍न को लूटा जमकर,
और फिर शायर ने शे'रो शाइरी की.

28-08-2018
हमें दोज़ख़ में डाले दे रही है,
ये कैसी बेरहम,मक्कार दुनिया.

किसी का क्या बिगाड़ा हमने था? जो
हमारी की गयी बरबाद दुनिया.

किसी ने कर दिया है ख़ूं किसी का
उसी को दे रही है दाद दुनिया

कि अब है पाप धोने में सहूलत,
चली जाती है हरि के द्वार दुनिया

हमीं हैं एक बस बन्धन यहां पर
ओ है आबाद, थी आबाद दुनिया

हमारी लूट में शामिल है ये भी
जो दिखती है ये थानेदार दुनिया

हमीं हम इश्क़ में खोजा फिरे थे
सभी की है जी हुस्ने-यार दुनिया

चुनेंगे दोस्त इनमें से ही ओ फिर
कहेंगे है बड़ी ग़मख़्वार दुनिया

कभी तो झाँककर देखा भी होता
हमारे दिल में भी है प्यार दुनिया

प्रिया ने रख दिया है सामने दिल
जिसे अब बांटना हो बाँट दुनिया.

हमीं ने ग़र्क की है, अब हमें भी
दिखाएगी नरक का द्वार दुनिया

मिलेगी मौत दिल के नाम पर ही
गो यूँ तो है बड़ी दिलदार दुनिया

31-08-2018
ज़माने ने दिया है प्यार इतना कि
मुझको ख़ुद से नफ़रत हो गयी है.

31-08-2018
मुझे वहशत ओ नफ़रत है मुझी से
मुझे मुझसे ही हैं शिकवे सभी अब.

02-09-2018
चलौ री राधिके नैक नन्द जू घर देखि आवें,
सुनी है, सांवरे बन के कन्हैया आय रहे हैं.

03-09-2018
देख! मिट जायेगी तल्ख़ी यूँ भी
मुझ को त्यौहार की बधाई दे दे.

03-09-2018
किसी पे दिल जो आये उसपे ही ग़र जान भी जाए,
तो फिर तो रोज़ मर-मर के कटेगी ज़िन्दगी अपनी.

04-09-2018
तुम जो आये हो तो महसूस कराओ
यूँ तो सब आते हैं, जाने के लिए ही!

04-09-2018
'इश्क़' है अब मेट्रो की सीढियां,
लिफ़्ट न हो, हांफ़ने लगते हैं हम!

05-09-2018
ऐसे किया है प्‍यार हमने उसको ऐ हुज़ूर
उठ उठ के खटोले से उसे देखते थे हम
  5-09-18 

Thursday, August 23, 2018

अगर वो लौटे तो थाम लेना
सौ में से कोई ही लौटता है
कुछ तो रब्‍त रख इतने भी न दूर हो जाएं
कि जब कभी मिलें तो अजनबी हो जाएं
जो तुमने की वो गल़ती माफ़ है
सुधरकर आओगे तो थाम लेंगे
नहीं ख़बर थी ऐसा लम्‍हा आएगा
एक मुसाफिर दिल लेकर उड़ जाएगा
हर ख़ाब पे क़ीमत चस्‍पा थी
हम जेब छुपाकर गुज़र गए
आम के पेड़ पर आम ढूंढती हो
तुम दुनिया से वाकि़फ़ नहीं हो?
कि अब ऑनलाइन आ जा
हम भी तो तिरे मुंतजि़र हैं
प्‍यार नहीं है क्लियर कह दे प्‍यार नहीं
झूठ मगर कत्‍तई मुझको बर्दाश्‍त नहीं
इश्‍क तो है जनाब खेत की मूली
हुस्‍न का पर कोई मुकाबला नहीं
किताबें चार कम पढ़ लीजिए
बुजुर्गों की सदा सुन लीजिए
एक ये ही काम कबसे कर रहे हैं
गिर रहे हैं उठ रहे हैं गिर रहे हैं
ये किससे घर बनाया था मैंने
कोई बहार फिर से ढहा गई
अगर आंखें हैं तो उनमें डूबता क्‍यूं हूं
जो डूबा ही हूं तो मर क्‍यों नहीं जाता
यूं तो हम मर ही चुके हैं सैकड़ों ही बार 
पर गुमां इस बात का है खुदकुशी न की
हम चले थे जानिबे मंजि़ल प्रिया
तुमने टोका और घर याद आ गया
पत्नियों को भूल जाते हैं पति
साल दो शादी के हो जाने के बाद
आरज़ू थी आरज़ू ही रह गई
पांव छूना चाहते थे आपके
नाम ले दूं ग़र तो मच जाए बवाल
ऐसे-ऐसों की देखी है नंगई हमने
नहीं अब जानना मुझको गुनह मेरा प्रिया
मेरी हसरत है कि मुझको सज़ा दे दीजिए
मोहब्‍बत में अजी कोई रूह भी होती है क्‍या
हमसे तो आजतक मांगा गया है जिस्‍म ही
घर, मकां, ससुराल और क्‍या मायका
सब फ़क़त एक छत के ही हैं आसरे
कहो फ़टाफ़ट तुम्‍हारे दिल में, है जो याद हमारी है.
नहीं तो झोला उठा लिए हम, अब चलने की बारी है.
गोली खाकर यार हंसा जाए कैसे
मुझको उसका प्‍यार समझ आए कैसे
दिल भी लगना था मेरा उससे ही
जिससे सीखी थी बेवफ़ाई मैंने
मिलती है कहीं तो पता दे भाई
मुझे एक पाव वफ़ा लेनी है
करते हैं दुआ, बीमार हों हम,
कुछ ऐसे भी चा रा ग र हैं.


बात राधे से शुरू, राधे पे ख़त्म हो गयी.

23-07-2018
न जाने कैसी नींद थी? रात भर एक ही सपना. उफ़्फ़ ट्रेन छूट गई.मेघ जी डाँट रहे- 'तुम तो ट्रेन में चढ़ गई थीं फिर छूटी कैसे?' अब परीक्षा! उसका क्या?

मैं ट्रेन के गेट पे थी, किसी ने कहा हमें उतरना है, पहले तुम उतरो! और मैं उतर गई! ट्रेन चल पड़ी.

ऐसे कौन करता है इस दुनिया में? तुम एकदम पागल हो प्रिया!

हम्म!

न जाने कौन सी परीक्षा थी? न जाने कौन से शहर जाना था? रात भर स्टेशन पर दौड़ती रही. ट्रेनों का पता और समय पूछती रही. ट्रेन आती-जाती रहीं, कसक स्थिर रही.

और फिर नींद खुल गयी, कुछ भी तो न हुआ ऐसा! सब तो हंस रहे! मेरा सर भारी है.

मेघ जी बताओ न! हक़ीक़त में कितनी तो ट्रेन छोड़ीं, इतना अफ़सोस क्यों न हुआ?

24-07-2018
किसे अब दोष दें? जब
करम अपने बुरे हैं!


26-07-2018
दिल का मे'रे हाल भी दुनिया सा है,
हर जगह लिंचिंग ही लिंचिंग हो रही.

24-07-2018
किसे अब दोष दें? जब
करम अपने बुरे हैं!

26-07-2018
तुमाई गली सों गुजरेंगे नैक दरबज्जे पे आय जइयों..

29-07-208
ज़िन्दगी क्या है जनाब?
घर दवाओं का है जी!

30-07-2018
औ'र था वो दौर दिल जब गां'धी का गाल था,
काँ'पने लगता है अब बीपी के घट जाने से ही.

30-07-2018
कहीं तो व्यस्त हो तुम,
कहीं दिल लग गया है?


31-07-2018
छोड़ गए जमुना तट पे, आ जाऔ श्याम वहीं मिलि लेंगे.
तुमहुँ बतयियों कहा बीती, हम'हूँ अपने मन की कहि लेंगे...

01-08-2018
छोड़ती क्‍यों नहीं राह तकना,
लौट कर कोई आता है क्‍या?

02-08-2018
इश्क़ के रिश्ते में हम दोनों का ये है ओहदा,
तुम जमाई के पिता हो और मैं बेटी की माँ.

02-08-2018
गिड़गिड़ाने से भी कब मिलती है ज़िन्दगी?
सर रख दिया है सा'मने अब काट दीजिए.


03-08-2018
रंजिशे बेजा का हमको तोहफ़ा!
दो'स्तों को हमारा सलाम पहुंचे.

04-08-2018
ख़ुद की नज़रों में थे पाकीज़: 'प्रिया'
औ'र की नज़रों से देखा, गिर गए.


05-08-2018
सभी जगहें हुयीं कोठा,
हवस के दौर में हैं हम!

_\ क्‍या मुज़फ्फ़रपुर क्‍या देवरिया.

06-08-2018
जिस्म तक पहुंचें'गे हा'थ लोगों के!
मोहब्बत हो न हो मसला नहीं अब.


06-08-2018
तू पा'गलों सा घूमे,
तुझको न चैन आये.
मेरी आरज़ू यही है
'मेरी' याद यूँ सताये.

सब पास में हों तेरे
तू सबको भूल जाए.
सब दें तुझे दिलासा
तुझे सब्र ही न आये.

करने को बात मुझसे
तू फोन तो उठाये,
पर जब मुझे मिलाये
नम्बर ही भूल जाए.

तड़पे ओ'मुझसे मिलने
सब छोड़कर तू आये,
चढ़ने को जब तू दौड़े
तेरी ट्रेन छूट जाए!

तब याद मेरी तुझको
कुछ इस तरह रुलाये,
रोती है जैसे विधवा'
कोने में सर टिकाये.

जब चुप कराये कोई
तू और बिलबिलाये,
तुझे याद मेरी आये
और बेहिसाब आये.

ये इल्म भी ज़रूरी
है आना 'प्रिया'आये
कि उम्र भर को कोई
बिछड़ा है तुझसे हाये.

07-08-2018
चुप हो गए हो तुम यूँ
ऐसा भी क्या हुआ है?
मैं माफ़ कर ही दूंगी,
इक फ़ोन यार कर लो.

8-08-2018
बदल दो श्लोक गीता के ओ' माधव,
यहां देखी हैं हमने आत्मा मरती हुई.

11-08-2018
हमें है इल्म ये किरदार ही हिस्से में आ'ना है.
हमारी जा'न जानी है, हमीं को मुस्कुराना है.

नहीं आया जो हमपे आजतक, वो, आजमाना है,
कि किसपे जान देनी है ओ' किससे दिल लगाना है.

वो ही जो प्यार से झां'से में लेकर बेच देता है,
उसी से कह रहे हैं हम कि ते'रा प्यार पाना है!

नहीं है दोष पर, कह दूँ तो दुनिया नोच डालेगी,
कि हमको माहवारी है, ख़ुदा के घर भी जाना है.

यही है गीत 'प्रिया' लिख के जिसको हम बड़ा रोये,
ओ' हँसकर कह रहे हैं सब, यही फिर से सुनाना है.


11-08-2018
खामखाँ है ये बताना भी कि हम हैं 'खामखाँ'

12-08-2018
जितनी मैंने सांस नहीं लीं,
उतने सबक हैं, मेरे पास.

13-08-2018
कि हमने झूठ भी जीए हैं ऐसे,
कि जैसे ज़िन्दगी जीते हैं लोग!

13-08-2018
यही रस्मो-रिवाज़ ए ज़िन्दगी सबको निभाना है,
किसी को छोड़ दे'ना है, किसी से छूट जा'ना है.

14-08-2018
दिल,सर,मन और साँसों से
कोई हमें दिला दो आज़ादी.

15-08-2018
ग़लतियां गिनना तो अपनी है बड़ा मुश्किल प्रिया!
आ ओ चल कर देखते हैं, उंगलियॉं कितनी उठीं?

15-08-2018
रात के पौने 3 बजे ये कैसा अलार्म लगाया नींद ने? दबे पाँव आज फिर निकल गयी. दरवाजों की सांकलें भी न ठिठकी. कोई आहट नहीं.
आज फिर किसी सपने से डरी थी क्या?
हां! सपना आया था.

किसी शहर की यात्रा पर निकली हूँ मैं. इस बार ट्रेन नहीं ली. हर बार ही तो छूट जाने का डर रहता था.

आज बस मैं हूँ. सीट न मिली, नीचे बैठी हूँ धरती पर. फिर भी मन नाच रहा, गीत गा रही. हँस रही.
कुछ हौले-हौले बुदबुदा रही, हलक सूख रहा.

बस रोको रे भैया... मुझे प्यास लगी है!

बस रोकी गयी है!
सभी सवारियां घूम आएं, बस चलने से पहले लौट आएं, ड्राइवर बोल रहा.

कोई बीच राह का शहर है, बड़े-बड़े कुएँ हैं. बड़ी भीड़ है. मेरे पास गिलास है, घर से लेकर चली थी. मुझे पानी चाहिए, गला खिंच रहा अब.

इतने बड़े-बड़े कुएँ? पर इनका पानी हरा क्यों है? मैं सोच रही खड़ी-खड़ी, वक़्त गुज़र गया. सब पानी पीकर लौट आये.
तूने पानी पीया प्रिया? एक बहन पूछ रही.
न , नहीं तो.. कहाँ है पानी?
अरे इस कुए में से जल्दी भर गिलास, और भाग, बस छूट रही.
मैं आधा गिलास भर पाई, एक घूँट मुंह में डाला, ओह! खारा है! नमक है! कैसे पीयूँ?
आँख भर गयी. एक घूँट मीठा पानी न मिला!

लेकिन इस बार बस पकड़नी है, मैं दौड़ रही.....
और ..बस पकड़ ली पर मैं प्यासी हूँ!

16-08-2018
पहले हिज्र बुरा लगता था,
अब लगता है, पीछा छूटा!

17-08-2018
एक लिखावट! कैसी बातें करती हो?
प्रिया लोग तो कई दस्तख़त रखते हैं.

17-08-2018
कब तक गुज़र करेंगे यूं?
दिन आख़िर बहुरेंगे यूँ?

दम घुटने से डर लगता था,
क्या अब यार मरेंगे यूँ?

सब ही तो नापाक हैं सा'ले
कितनों को बख्शेंगे यूँ?

जा'ने वा'लों में जू'ते सौ
कब तक राह तकेंगे यूँ?

पति देवता है 'प्रिया' तो
क्या उसको छल लेंगे यूँ?

अब कुछ ढंग के काम करेंगे,
कब तक इश्क़ करेंगे यू?

आज, अभी से सुधरेगा, जी
दिल के पेंच कसेंगे यूँ!

18-08-2018
एक ही शख़्स हु'आ है रुख़सत
हो गया फिर क्यों ये शहर तन्हा

19-08-2018
लोग लिखते हैं जो अच्छा काफ़ी,
लोग अच्छे हों, ये ज़रूरी तो नहीं.

20-08-2018
आप करते हैं उम्मीद मो'हब्बत निभाने की!
लोगों को तमीज़ नहीं हाथ तक मिलाने की.

20-08-2018
नीच देखे बड़े हमने ज़माने में,
ज़िन्दगी पर तुझसा नहीं देखा.

21-08-2018
ऊधौ कछु बोलो मोरे स्‍याम का करत हैं? Priya Gautam
आठौ याम प्रेम की चिरैय्या कूं तकत हैं।। गोस्वामी पुष्पांग
ज़िन्दगी यूँ तो कई बार मिली
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.

ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.

चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.

वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?

बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.

शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.

22-06-2018
आने-जाने से होती थी तोड़-फोड़ बहुत !
सो हमने दिल में एक दरवाजा बना दिया.

23-08-2018

Wednesday, July 25, 2018


बेटा अब दिल में लिंचिंग करवाएंगे
देखो तुमको कितना हम कुटवाएंगे;

तुम जो अपने को समझे हो शाहजहाॅं,
नूरजहां कह कर मुजरा करवाएंगे;

और कन्‍हैया कहकर जो इतराते हो
रास तुम्‍हींं से चौड़े में रचवाएंगे.

बहुत मौज में तुम हो कुछ दिन ले लो फिर
तुमको प्‍यारे मौज हमींं दिलवाएंगे.

तुम रो ओगे, तड़पोगे, चिल्‍लाओगे,
हम चौकी पर बैठ मलीदा खाएंगे.

नाम डुबोया है तुमने जो यारी का
बेट्टा तुमको यारी हम सिखलाएंगे.

आज चढ़ा लो मस्‍ती की बोतल, कल को
तुमको बेट्टा याद हमींं-हम आएंगे.

100 गाली तो रोज़ हमींं दे लेते हैं,
और बची जो गूगल से दिलवाएंगे.

चलो दुश्‍मनी तगड़ी कर लेते हैं अब
वरना यारी में तो मारे जाएंगे.









Tuesday, July 24, 2018

उन्‍हें कुछ वक्‍़त देना था किसी को,
हुआ फिर यूं कि हमसे लीव ले ली.

Monday, July 23, 2018

टूट जाना नींद का फिर याद आ जाना किसी का !
अजी!आँखें नहीं उनकी, समन्दर हैं,
हम इक मछली हज़ारों और के जैसे!
याद में लैला की पढ़कर शे'र, फिर
'क़ैस' सा'हिब तान चद्दर सो गए.
आ'धी दुनिया इस डर में ही उलझी है,
उसको-उससे प्यार कहीं हो जाए ना!
जिसे मैं देखती हूं वो किसी को देखता होगा,
जिसे वो देखता होगा वही शायद ख़ुदा होगा!

Thursday, July 19, 2018

उस चारागर को बुला दो जो,
मेरे 'जी' को हल्का कर सके!
ज़िन्दगी लम्बी नहीं है!
लौट के आ जाओ सब.
पीर नई है,
घाव पुराने दूख रहे हैं,
मन पे पड़े थे
वो छाले अब फूट रहे हैं !
ईश्वर को गाली देना सबसे सरल कृत्य है, ये हम तब करते हैं जब हम और कुछ नहीं करते!
मुझे छुट्टी मिले तो वृन्दावन चली जाऊँ मैं.
कहीं यूँ सोचते-सोचते ही न मर जाऊँ मैं.
जिनको न हंसने की हंसाने की समझ,
वो भाड़ में जाएं कसम से भाड़ में जाएं.
जो दिल के, दर्द को रोएँ,
वो सर का, दर्द क्या जानें.
किसी के दिल में होता हो, हमारे सर में उठता है.
वही जिस को ज़माने भर के शायर 'दर्द' कहते हैं.
आँखें तेरी कह रही हैं,
रात गुज़री किस तरह.
ढूंढत-ढूंढत श्याम को मोरे दूखन लागे नैन...
वृन्दावन पहुँचाय दो मोहे तब ही आवे चैन.....
बु'राई में कहाँ था दम हमें बर्बाद करने का,
ज़माना नेकनीयत था हमारे क़त्ल होने तक.
दुनिया के ही तो हो तुम,
तुम सी ही होगी दुनिया.
सबका मन तो लगता है इस दुनिया में!
इक मेरा ही क्यों नहीं लगता?
ग़रीबों को मौत से ज्‍यादा 'अमीरी' ने मारा है.
मिरे मरने पे वो रोये, हंसे या गालियां ही दे,
मैं ये बस चाहता हूँ कोई उसको इत्तला दे दे.
तुम्हें याद आ'ती होगी दोस्तों की,
हमें दुश्मनों की ने बेकल किया है.
मैं ढूंढ रहा हूँ उसको जो बस मिला ही था पर मिला नहीं.
चलो फिर आ गया कर्ज
अरे हां-हां वही सर-दर्द.
चाहने से हम कहां खुश हो सके?
दिल दुखाने की व्‍यवस्‍था कीजिए.

इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्‍मरां पेट्राेल सस्‍ता कीजिए.

ज़‍िंदगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.

आदमी में खो गई इंसानियत,
ख़ाक़ इनको तुम फरिश्‍ता कीजिए.

हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.
इक तुम ही नहीं ग़मदीद 'प्रिया'
बहुतों पे बहुत कुछ बीती है...
शायरों से दोस्‍ती फिर सब्र से,
ज़‍िंदग़ी को झंड होते देखिए.
हम जो ईमानदार हुए,
ज़माना बेईमान हुआ.
मैं प्यास में था और वो देते गए दाना,
हाँ! मर गया अब लाश को ढोया करे कोई.
फिर उसी क़ाफ़‍िर का मुझको इंतिज़ार,
फिर उसी से हिज्र की है आरज़ू...
हमें मौज में कुछ कमी तो नहीं, पर,
जलाने का तुमको अलग ही मज़ा है.
किसलिए करते हो यारों रंज-ओ-ग़म?
ज़िन्दगी कुल चार दिन की ही तो है!
मुझे ये इल्म था तुम भूल जाओगे,
यही अफ़सोस है बस इस तरह भूले!
चलो फिर मर गयी गुफ़्तुगू,
चलो! फिर फातिहा पढ़ें!
हमने कहा-हमें प्रेम है.
उसने कहा-जी शुक्रिया!
भाई-चारा इस तरह पैदा हुआ संसार में,
चार का दिल तोड़ने वालों ने जोड़े चार के!
सब-कुछ चला जाता है!
याद भी चली ही जाएगी.
ज़िन्दगी किसी के नाम कीजिए,
फिर लीजिए मज़ा बे-पनाही का!
सब भूल गए हमें!
अब हम किसे भूलें?
हलक से खींचना इक नाम को,
उसे फिर फेंकने का स्वांग दिनभर!
भला क्‍यों सुने वो तुम्‍हारी चीख?
तुम ही मरी थीं तो मर जाओ न!
हम जो नहीं थे उन जैसों में,
आख़ि‍र उनमें ही शुमार हुए!
कोई रहता था क्‍या मिरे भीतर?
क्‍यों अब खाली सा हो गया हूं?
बुरे लोग शरीर नोचते हैं
और शरीफ़ लोग आत्मा!
इश्क़ क्या है?
शिकस्ते फ़ाश है!
प्‍यार क्‍या है?
दो दिनों की वर्कशॉप!
इक तुमको न आती है न आए,
सैकड़ों हैं हमें याद करने वाले.
रंग खिलते हैं सभी उसपे मगर,
जान लेता है वो पीला कुरता.

आज पहनूँगी मैं पीली साड़ी,
उसने पहना है जो पीला कुरता.

हाये ये क़त्ल समां, कौन सा रंग पहना प्रिया?
उस ने कहा- मैंने हरा, जान ने पीला कुरता!

रंग जहाँ से उड़ गए सारे
बचा रह गया पीला कुरता.

चलो कहानी खत्‍म हुई अब,
खत्‍म हो गया पीला कुरता.

वो भी पागल है लेकिन बस मेरे पागल हो जाने तक.
जन्नत की चाह ले गयी मेरा सुकूँ-ए-दिल,
जां-ओ-जमीन लुट गयी दोज़ख़ में जा गिरे!
घुटा जा रहा हूँ मैं भीतर ही भीतर,
बता चीख लूँ क्या? तिरा नाम लेकर.
हमारा यही आज-कल है तराना,
तुम्हें याद करना तुम्हें भूल जाना.
याद में तेरी पागल हूं, दिल सोच के पर ये ठहरा है
कि पांव में मेरे घुंघरू हैं और हर रस्‍ते पर पहरा है.

Monday, June 25, 2018

पैग़ाम-ए-दिल तुझे अब किसके सहारे भेजूं,
मेरी ही दुश्मन हो गई, मेरे शहर की हवा.
गिरते ज्यादा हैं, कम चलते हैं,
वो लोग बड़ी जल्दी सम्भलते हैं.
मेरे माथे में जो ठहरा है,
ये दर्द-दवा से गहरा है!
जिसको मिलूं वो मेरे घर कर देना इत्‍तला,
अब मैं कहां हूं, कौन हूं? मुझको नहीं खबर !
यूँ तो अब अक्सर ही बहुत हंसता हूँ मैं,
कुछ बात हैं पर जिनपे दिल टूटा करता है!
कैसे मैं चुन लूँ राह तेरी, कैसे मैं तेरे साथ चलूँ?
तेरी आरज़ू में ही पागल हुई हूँ,
जो मिल जाए तू तो ख़ुदा जाने क्या हो?
ये कैसा दौर ज़ालिम है?
सज़ा मिलती है पहले
और ख़ताऐं बाद में होती हैं तय!
मर रहा है हर वो आदमी जो जीना चाहता है!
पीरों की चौखट पर अब मैं खाली-खाली फिरती हूं,
सब धागे मन्‍नत के मैंने एक ही दर पर बांध दिए.
कोई सांवरे से कह दो, मुझे याद आ रही है.
ग़ैर-ज़रूरी चीजें याद रहती हैं,
हर ज़रूरी बात भूल जाता हूँ.

सुब्‍ह से रोज निकल जाता हूं,
हो गई रात भूल जाता हूं.


उस चारागर को बुला दो जो,
मेरे 'जी' को हल्का कर सके!
ज़िन्दगी लम्बी नहीं है!
लौट के आ जाओ सब.
पीर नई है,
घाव पुराने दूख रहे हैं,
मन पे पड़े थे
वो छाले अब फूट रहे हैं !
ईश्वर को गाली देना सबसे सरल कृत्य है, ये हम तब करते हैं जब हम और कुछ नहीं करते!
मुझे छुट्टी मिले तो वृन्दावन चली जाऊँ मैं.
कहीं यूँ सोचते-सोचते ही न मर जाऊँ मैं.
जिनको न हंसने की हंसाने की समझ,
वो भाड़ में जाएं कसम से भाड़ में जाएं.
जो दिल के, दर्द को रोएँ,
वो सर का, दर्द क्या जानें.
किसी के दिल में होता हो, हमारे सर में उठता है.
वही जिस को ज़माने भर के शायर 'दर्द' कहते हैं.
आँखें तेरी कह रही हैं,
रात गुज़री किस तरह.
ढूंढत-ढूंढत श्याम को मोरे दूखन लागे नैन...
वृन्दावन पहुँचाय दो मोहे तब ही आवे चैन.....
बु'राई में कहाँ था दम हमें बर्बाद करने का,
ज़माना नेकनीयत था हमारे क़त्ल होने तक.
दुनिया के ही तो हो तुम,
तुम सी ही होगी दुनिया.
सबका मन तो लगता है इस दुनिया में!
इक मेरा ही क्यों नहीं लगता?
मिरे मरने पे वो रोये, हंसे या गालियां ही दे,
मैं ये बस चाहता हूँ कोई उसको इत्तला दे दे.
तुम्हें याद आ'ती होगी दोस्तों की,
हमें दुश्मनों की ने बेकल किया है.
चलो फिर आ गया कर्ज
अरे हां-हां वही सर-दर्द.
मैं ढूंढ रहा हूँ उसको जो बस मिला ही था पर मिला नहीं.
चाहने से हम कहां खुश हो सके?
दिल दुखाने की व्‍यवस्‍था कीजिए.

इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्‍मरां पेट्राेल सस्‍ता कीजिए.

जि़न्‍दगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.

आदमी में खो गई इंसानियत,
खा़क इनको तुम फरिश्‍ता कीजिए.

हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.