प्यार है न प्यार का नामो निशाँ
ये समझिये काटना है वक्त बस
5 sept
Saturday, October 13, 2018
मैं'ने पकड़ा हाथ तेरा नींद में चलते हुए
और फिर ठोकर भी खाई नींद में चलते हुए.
हाथ छोड़ा तूने, मेरा दम निकलकर आ गया,
और फिर फूटी रुलाई नींद में चलते हुए.
एक ही तो बात कहनी थी मुझे तुझसे मगर,
बात जाने क्या सुनाई? नींद में चलते हुए.
मैं ही कन्धे पर थी, मैं ही रो रही थी फर्श पर
मैं'ने ही अर्थी उठाई नींद में चलते हुए.
होश में जो भूल बैठी थी 'प्रिया' फिर क्यों भला,
याद आई आशनाई नींद में चलते हुए?
18 sept
और फिर ठोकर भी खाई नींद में चलते हुए.
हाथ छोड़ा तूने, मेरा दम निकलकर आ गया,
और फिर फूटी रुलाई नींद में चलते हुए.
एक ही तो बात कहनी थी मुझे तुझसे मगर,
बात जाने क्या सुनाई? नींद में चलते हुए.
मैं ही कन्धे पर थी, मैं ही रो रही थी फर्श पर
मैं'ने ही अर्थी उठाई नींद में चलते हुए.
होश में जो भूल बैठी थी 'प्रिया' फिर क्यों भला,
याद आई आशनाई नींद में चलते हुए?
18 sept
न कोई ख़्वाहिश न ख़ाब कोई
मैं बस किसी की तला'श में हूँ.
वही जो मुझमें है आधा-आधा
है, को'ई दूजा या मैं-ही-मैं हूँ.
बड़ी ही बेकल है सांस, शायद
जो मिट न पाई वो प्यास मैं हूँ!
मुझे भी बतला दो ऐ ज़हीनों
कि मैं हूँ ज़िंदा या लाश मैं हूँ?
कुचल ही जाना है भाग्य मेरा
हां वो ही शायद, पलाश मैं हूँ!
किसी तरसते को जाके दे दो.
भरा हुआ एक गिलास मैं हूँ!
1 oct
Wednesday, September 5, 2018
ज़िन्दगी यूँ तो कई बार मिली
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.
ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.
चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.
वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?
बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.
शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.
22-08-2018
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.
ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.
चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.
वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?
बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.
शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.
22-08-2018
हमें दोज़ख़ में डाले दे रही है,
ये कैसी बेरहम,मक्कार दुनिया.
किसी का क्या बिगाड़ा हमने था? जो
हमारी की गयी बरबाद दुनिया.
किसी ने कर दिया है ख़ूं किसी का
उसी को दे रही है दाद दुनिया
कि अब है पाप धोने में सहूलत,
चली जाती है हरि के द्वार दुनिया
हमीं हैं एक बस बन्धन यहां पर
ओ है आबाद, थी आबाद दुनिया
हमारी लूट में शामिल है ये भी
जो दिखती है ये थानेदार दुनिया
हमीं हम इश्क़ में खोजा फिरे थे
सभी की है जी हुस्ने-यार दुनिया
चुनेंगे दोस्त इनमें से ही ओ फिर
कहेंगे है बड़ी ग़मख़्वार दुनिया
कभी तो झाँककर देखा भी होता
हमारे दिल में भी है प्यार दुनिया
प्रिया ने रख दिया है सामने दिल
जिसे अब बांटना हो बाँट दुनिया.
हमीं ने ग़र्क की है, अब हमें भी
दिखाएगी नरक का द्वार दुनिया
मिलेगी मौत दिल के नाम पर ही
गो यूँ तो है बड़ी दिलदार दुनिया
31-08-2018
ये कैसी बेरहम,मक्कार दुनिया.
किसी का क्या बिगाड़ा हमने था? जो
हमारी की गयी बरबाद दुनिया.
किसी ने कर दिया है ख़ूं किसी का
उसी को दे रही है दाद दुनिया
कि अब है पाप धोने में सहूलत,
चली जाती है हरि के द्वार दुनिया
हमीं हैं एक बस बन्धन यहां पर
ओ है आबाद, थी आबाद दुनिया
हमारी लूट में शामिल है ये भी
जो दिखती है ये थानेदार दुनिया
हमीं हम इश्क़ में खोजा फिरे थे
सभी की है जी हुस्ने-यार दुनिया
चुनेंगे दोस्त इनमें से ही ओ फिर
कहेंगे है बड़ी ग़मख़्वार दुनिया
कभी तो झाँककर देखा भी होता
हमारे दिल में भी है प्यार दुनिया
प्रिया ने रख दिया है सामने दिल
जिसे अब बांटना हो बाँट दुनिया.
हमीं ने ग़र्क की है, अब हमें भी
दिखाएगी नरक का द्वार दुनिया
मिलेगी मौत दिल के नाम पर ही
गो यूँ तो है बड़ी दिलदार दुनिया
31-08-2018
Thursday, August 23, 2018
न जाने कैसी नींद थी? रात भर एक ही सपना. उफ़्फ़ ट्रेन छूट गई.मेघ जी डाँट रहे- 'तुम तो ट्रेन में चढ़ गई थीं फिर छूटी कैसे?' अब परीक्षा! उसका क्या?
मैं ट्रेन के गेट पे थी, किसी ने कहा हमें उतरना है, पहले तुम उतरो! और मैं उतर गई! ट्रेन चल पड़ी.
ऐसे कौन करता है इस दुनिया में? तुम एकदम पागल हो प्रिया!
हम्म!
न जाने कौन सी परीक्षा थी? न जाने कौन से शहर जाना था? रात भर स्टेशन पर दौड़ती रही. ट्रेनों का पता और समय पूछती रही. ट्रेन आती-जाती रहीं, कसक स्थिर रही.
और फिर नींद खुल गयी, कुछ भी तो न हुआ ऐसा! सब तो हंस रहे! मेरा सर भारी है.
मेघ जी बताओ न! हक़ीक़त में कितनी तो ट्रेन छोड़ीं, इतना अफ़सोस क्यों न हुआ?
24-07-2018
मैं ट्रेन के गेट पे थी, किसी ने कहा हमें उतरना है, पहले तुम उतरो! और मैं उतर गई! ट्रेन चल पड़ी.
ऐसे कौन करता है इस दुनिया में? तुम एकदम पागल हो प्रिया!
हम्म!
न जाने कौन सी परीक्षा थी? न जाने कौन से शहर जाना था? रात भर स्टेशन पर दौड़ती रही. ट्रेनों का पता और समय पूछती रही. ट्रेन आती-जाती रहीं, कसक स्थिर रही.
और फिर नींद खुल गयी, कुछ भी तो न हुआ ऐसा! सब तो हंस रहे! मेरा सर भारी है.
मेघ जी बताओ न! हक़ीक़त में कितनी तो ट्रेन छोड़ीं, इतना अफ़सोस क्यों न हुआ?
24-07-2018
तू पा'गलों सा घूमे,
तुझको न चैन आये.
मेरी आरज़ू यही है
'मेरी' याद यूँ सताये.
सब पास में हों तेरे
तू सबको भूल जाए.
सब दें तुझे दिलासा
तुझे सब्र ही न आये.
करने को बात मुझसे
तू फोन तो उठाये,
पर जब मुझे मिलाये
नम्बर ही भूल जाए.
तड़पे ओ'मुझसे मिलने
सब छोड़कर तू आये,
चढ़ने को जब तू दौड़े
तेरी ट्रेन छूट जाए!
तब याद मेरी तुझको
कुछ इस तरह रुलाये,
रोती है जैसे विधवा'
कोने में सर टिकाये.
जब चुप कराये कोई
तू और बिलबिलाये,
तुझे याद मेरी आये
और बेहिसाब आये.
ये इल्म भी ज़रूरी
है आना 'प्रिया'आये
कि उम्र भर को कोई
बिछड़ा है तुझसे हाये.
07-08-2018
तुझको न चैन आये.
मेरी आरज़ू यही है
'मेरी' याद यूँ सताये.
सब पास में हों तेरे
तू सबको भूल जाए.
सब दें तुझे दिलासा
तुझे सब्र ही न आये.
करने को बात मुझसे
तू फोन तो उठाये,
पर जब मुझे मिलाये
नम्बर ही भूल जाए.
तड़पे ओ'मुझसे मिलने
सब छोड़कर तू आये,
चढ़ने को जब तू दौड़े
तेरी ट्रेन छूट जाए!
तब याद मेरी तुझको
कुछ इस तरह रुलाये,
रोती है जैसे विधवा'
कोने में सर टिकाये.
जब चुप कराये कोई
तू और बिलबिलाये,
तुझे याद मेरी आये
और बेहिसाब आये.
ये इल्म भी ज़रूरी
है आना 'प्रिया'आये
कि उम्र भर को कोई
बिछड़ा है तुझसे हाये.
07-08-2018
हमें है इल्म ये किरदार ही हिस्से में आ'ना है.
हमारी जा'न जानी है, हमीं को मुस्कुराना है.
नहीं आया जो हमपे आजतक, वो, आजमाना है,
कि किसपे जान देनी है ओ' किससे दिल लगाना है.
वो ही जो प्यार से झां'से में लेकर बेच देता है,
उसी से कह रहे हैं हम कि ते'रा प्यार पाना है!
नहीं है दोष पर, कह दूँ तो दुनिया नोच डालेगी,
कि हमको माहवारी है, ख़ुदा के घर भी जाना है.
यही है गीत 'प्रिया' लिख के जिसको हम बड़ा रोये,
ओ' हँसकर कह रहे हैं सब, यही फिर से सुनाना है.
11-08-2018
हमारी जा'न जानी है, हमीं को मुस्कुराना है.
नहीं आया जो हमपे आजतक, वो, आजमाना है,
कि किसपे जान देनी है ओ' किससे दिल लगाना है.
वो ही जो प्यार से झां'से में लेकर बेच देता है,
उसी से कह रहे हैं हम कि ते'रा प्यार पाना है!
नहीं है दोष पर, कह दूँ तो दुनिया नोच डालेगी,
कि हमको माहवारी है, ख़ुदा के घर भी जाना है.
यही है गीत 'प्रिया' लिख के जिसको हम बड़ा रोये,
ओ' हँसकर कह रहे हैं सब, यही फिर से सुनाना है.
11-08-2018
रात के पौने 3 बजे ये कैसा अलार्म लगाया नींद ने? दबे पाँव आज फिर निकल गयी. दरवाजों की सांकलें भी न ठिठकी. कोई आहट नहीं.
आज फिर किसी सपने से डरी थी क्या?
हां! सपना आया था.
किसी शहर की यात्रा पर निकली हूँ मैं. इस बार ट्रेन नहीं ली. हर बार ही तो छूट जाने का डर रहता था.
आज बस मैं हूँ. सीट न मिली, नीचे बैठी हूँ धरती पर. फिर भी मन नाच रहा, गीत गा रही. हँस रही.
कुछ हौले-हौले बुदबुदा रही, हलक सूख रहा.
बस रोको रे भैया... मुझे प्यास लगी है!
बस रोकी गयी है!
सभी सवारियां घूम आएं, बस चलने से पहले लौट आएं, ड्राइवर बोल रहा.
कोई बीच राह का शहर है, बड़े-बड़े कुएँ हैं. बड़ी भीड़ है. मेरे पास गिलास है, घर से लेकर चली थी. मुझे पानी चाहिए, गला खिंच रहा अब.
इतने बड़े-बड़े कुएँ? पर इनका पानी हरा क्यों है? मैं सोच रही खड़ी-खड़ी, वक़्त गुज़र गया. सब पानी पीकर लौट आये.
तूने पानी पीया प्रिया? एक बहन पूछ रही.
न , नहीं तो.. कहाँ है पानी?
अरे इस कुए में से जल्दी भर गिलास, और भाग, बस छूट रही.
मैं आधा गिलास भर पाई, एक घूँट मुंह में डाला, ओह! खारा है! नमक है! कैसे पीयूँ?
आँख भर गयी. एक घूँट मीठा पानी न मिला!
लेकिन इस बार बस पकड़नी है, मैं दौड़ रही.....
और ..बस पकड़ ली पर मैं प्यासी हूँ!
16-08-2018
आज फिर किसी सपने से डरी थी क्या?
हां! सपना आया था.
किसी शहर की यात्रा पर निकली हूँ मैं. इस बार ट्रेन नहीं ली. हर बार ही तो छूट जाने का डर रहता था.
आज बस मैं हूँ. सीट न मिली, नीचे बैठी हूँ धरती पर. फिर भी मन नाच रहा, गीत गा रही. हँस रही.
कुछ हौले-हौले बुदबुदा रही, हलक सूख रहा.
बस रोको रे भैया... मुझे प्यास लगी है!
बस रोकी गयी है!
सभी सवारियां घूम आएं, बस चलने से पहले लौट आएं, ड्राइवर बोल रहा.
कोई बीच राह का शहर है, बड़े-बड़े कुएँ हैं. बड़ी भीड़ है. मेरे पास गिलास है, घर से लेकर चली थी. मुझे पानी चाहिए, गला खिंच रहा अब.
इतने बड़े-बड़े कुएँ? पर इनका पानी हरा क्यों है? मैं सोच रही खड़ी-खड़ी, वक़्त गुज़र गया. सब पानी पीकर लौट आये.
तूने पानी पीया प्रिया? एक बहन पूछ रही.
न , नहीं तो.. कहाँ है पानी?
अरे इस कुए में से जल्दी भर गिलास, और भाग, बस छूट रही.
मैं आधा गिलास भर पाई, एक घूँट मुंह में डाला, ओह! खारा है! नमक है! कैसे पीयूँ?
आँख भर गयी. एक घूँट मीठा पानी न मिला!
लेकिन इस बार बस पकड़नी है, मैं दौड़ रही.....
और ..बस पकड़ ली पर मैं प्यासी हूँ!
16-08-2018
कब तक गुज़र करेंगे यूं?
दिन आख़िर बहुरेंगे यूँ?
दम घुटने से डर लगता था,
क्या अब यार मरेंगे यूँ?
सब ही तो नापाक हैं सा'ले
कितनों को बख्शेंगे यूँ?
जा'ने वा'लों में जू'ते सौ
कब तक राह तकेंगे यूँ?
पति देवता है 'प्रिया' तो
क्या उसको छल लेंगे यूँ?
अब कुछ ढंग के काम करेंगे,
कब तक इश्क़ करेंगे यू?
आज, अभी से सुधरेगा, जी
दिल के पेंच कसेंगे यूँ!
18-08-2018
दिन आख़िर बहुरेंगे यूँ?
दम घुटने से डर लगता था,
क्या अब यार मरेंगे यूँ?
सब ही तो नापाक हैं सा'ले
कितनों को बख्शेंगे यूँ?
जा'ने वा'लों में जू'ते सौ
कब तक राह तकेंगे यूँ?
पति देवता है 'प्रिया' तो
क्या उसको छल लेंगे यूँ?
अब कुछ ढंग के काम करेंगे,
कब तक इश्क़ करेंगे यू?
आज, अभी से सुधरेगा, जी
दिल के पेंच कसेंगे यूँ!
18-08-2018
ज़िन्दगी यूँ तो कई बार मिली
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.
ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.
चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.
वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?
बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.
शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.
22-06-2018
ज़ुर्मे ख़ूं में ही गिरफ़्तार मिली.
ख़ून भी मेरा ओ' मैं ही क़ातिल
उसपे मुझको ही सज़ा यार मिली.
चाह को पी लूँ, तलब थी मेरी,
वो भी मेरी ही तलबगार मिली.
वक़्त पे हमने किये सारे हिसाब
फिर भी हर चीज़ क्यों उधार मिली?
बच भी पाते तो भला कैसे प्रिया?
सबके चाकू में ग़ज़ब धार मिली.
शक्लो-शोहरत पे खरोंचें न मिलीं,
एक बस रूह ज़ार-ज़ार मिली.
22-06-2018
Wednesday, July 25, 2018
बेटा अब दिल में लिंचिंग करवाएंगे
देखो तुमको कितना हम कुटवाएंगे;
तुम जो अपने को समझे हो शाहजहाॅं,
नूरजहां कह कर मुजरा करवाएंगे;
और कन्हैया कहकर जो इतराते हो
रास तुम्हींं से चौड़े में रचवाएंगे.
बहुत मौज में तुम हो कुछ दिन ले लो फिर
तुमको प्यारे मौज हमींं दिलवाएंगे.
तुम रो ओगे, तड़पोगे, चिल्लाओगे,
हम चौकी पर बैठ मलीदा खाएंगे.
नाम डुबोया है तुमने जो यारी का
बेट्टा तुमको यारी हम सिखलाएंगे.
आज चढ़ा लो मस्ती की बोतल, कल को
तुमको बेट्टा याद हमींं-हम आएंगे.
100 गाली तो रोज़ हमींं दे लेते हैं,
और बची जो गूगल से दिलवाएंगे.
चलो दुश्मनी तगड़ी कर लेते हैं अब
वरना यारी में तो मारे जाएंगे.
Monday, July 23, 2018
Thursday, July 19, 2018
चाहने से हम कहां खुश हो सके?
दिल दुखाने की व्यवस्था कीजिए.
इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्मरां पेट्राेल सस्ता कीजिए.
ज़िंदगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.
आदमी में खो गई इंसानियत,
ख़ाक़ इनको तुम फरिश्ता कीजिए.
हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.
दिल दुखाने की व्यवस्था कीजिए.
इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्मरां पेट्राेल सस्ता कीजिए.
ज़िंदगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.
आदमी में खो गई इंसानियत,
ख़ाक़ इनको तुम फरिश्ता कीजिए.
हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.
Monday, June 25, 2018
चाहने से हम कहां खुश हो सके?
दिल दुखाने की व्यवस्था कीजिए.
इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्मरां पेट्राेल सस्ता कीजिए.
जि़न्दगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.
आदमी में खो गई इंसानियत,
खा़क इनको तुम फरिश्ता कीजिए.
हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.
दिल दुखाने की व्यवस्था कीजिए.
इस जहॉं में आग देनी है हमें,
हुक्मरां पेट्राेल सस्ता कीजिए.
जि़न्दगी बिकती नहीं है आजकल
आइए लाशों पे चर्चा कीजिए.
आदमी में खो गई इंसानियत,
खा़क इनको तुम फरिश्ता कीजिए.
हम तो अपना सब लुटा बैठे 'प्रिया'
तुम भी साहब कुछ तो खर्चा की कीजिए.
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