गज़ल
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तुम दर्द हो या करार हो,
पर जो भी हो मेरा प्यार हो..।।
निगाहों से दिल में उतर जाते हो
दिल से सांसों में उमड़ आते हो
फिर आंखों से बरस जाते हो,
तुम इश्क हो या गुबार हो.....पर जो भी हो.....
जब भी देखती हूं मैं शीशे में अक्स अपना
एक चेहरा मेरे चेहरे में नजर आता है
जब भी गुजरता है कोई हवा का झौंका
वो चेहरा मुझे छूकर गुजर जाता है...
मैं पलटती हूं..ढूंढती हूं...बार बार पूछ़ती हूं..
तुम जिंदगी या बस एक खुमार हो.......पर जो भी हो मेरा प्यार हो...।।।।
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तुम दर्द हो या करार हो,
पर जो भी हो मेरा प्यार हो..।।
निगाहों से दिल में उतर जाते हो
दिल से सांसों में उमड़ आते हो
फिर आंखों से बरस जाते हो,
तुम इश्क हो या गुबार हो.....पर जो भी हो.....
जब भी देखती हूं मैं शीशे में अक्स अपना
एक चेहरा मेरे चेहरे में नजर आता है
जब भी गुजरता है कोई हवा का झौंका
वो चेहरा मुझे छूकर गुजर जाता है...
मैं पलटती हूं..ढूंढती हूं...बार बार पूछ़ती हूं..
तुम जिंदगी या बस एक खुमार हो.......पर जो भी हो मेरा प्यार हो...।।।।
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