दुनिया भर में ..दिलों की चोरी की खबरों से हैरान हो !
हम अपने दिल को छुपा आए तहखाने में...
सबसे दूर,
एकांत के अंधेरे कोने में..
कुछ वक्त बाद, किसी प्रेम के महीने में
दिलों को खुले बाजार में बिकते और उड़ते देखा ..
तो अचानक
दिल की याद आई..
हम सीधे तहखाने पहुंचे..
खोला..
तो पाया
दिल को चूहे कुतर चुके थे..!
अब न दिल था..!!
न दिलबर !
न दिलनशीं !
और न चोरी का डर ..!!
बस थी तो कुछ बिखरी हुई कतरनें और उन कतरनों को घुटनों के बल बैठकर समेटते हम...
हम अपने दिल को छुपा आए तहखाने में...
सबसे दूर,
एकांत के अंधेरे कोने में..
कुछ वक्त बाद, किसी प्रेम के महीने में
दिलों को खुले बाजार में बिकते और उड़ते देखा ..
तो अचानक
दिल की याद आई..
हम सीधे तहखाने पहुंचे..
खोला..
तो पाया
दिल को चूहे कुतर चुके थे..!
अब न दिल था..!!
न दिलबर !
न दिलनशीं !
और न चोरी का डर ..!!
बस थी तो कुछ बिखरी हुई कतरनें और उन कतरनों को घुटनों के बल बैठकर समेटते हम...
No comments:
Post a Comment