Wednesday, April 9, 2014

गज़ल
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मैं वो दरिया हूं जल रहा हूं
तेरे कदमों के निशानों पै चल रहा हूं..।।

खो गई रूह, बदन लाश हुआ,
दौड़ रेतीली हवाओं से कर रहा हूं..।।

इश्क है आग, मेरा दिल पानी,
बुझ गया तू मैं मजारों सा जल रहा हूं..।।

नाखुदा भी तो डुबा देते हैं,
मैं ये तक्रीर खुदाओं से कर रहा हूं..।।

नासमझ तुझसे ‌गिला क्या होगा,
मैं तो आगाह जमाने को कर रहा हूं..।।

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