जलते रहो
गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना, सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Saturday, October 13, 2018
न तो दर्द ही है ये हिज्र का, न ही वस्ल की तीख़ी तलब,
फिर है भला मेरे दिल में क्या, ये जो उठ रहा है ग़ुबार सा!
12 oct
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