जलते रहो
गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना, सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Monday, July 23, 2018
अजी!आँखें नहीं उनकी, समन्दर हैं,
हम इक मछली हज़ारों और के जैसे!
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