Saturday, October 13, 2018

मैं'ने पकड़ा हाथ तेरा नींद में चलते हुए
और फिर ठोकर भी खाई नींद में चलते हुए.

हाथ छोड़ा तूने, मेरा दम निकलकर आ गया,
और फिर फूटी रुलाई नींद में चलते हुए.

एक ही तो बात कहनी थी मुझे तुझसे मगर,
बात जाने क्या सुनाई? नींद में चलते हुए.

मैं ही कन्धे पर थी, मैं ही रो रही थी फर्श पर
मैं'ने ही अर्थी उठाई नींद में चलते हुए.

होश में जो भूल बैठी थी 'प्रिया' फिर क्यों भला,
याद आई आशनाई नींद में चलते हुए?

18 sept

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