Thursday, August 23, 2018

तू पा'गलों सा घूमे,
तुझको न चैन आये.
मेरी आरज़ू यही है
'मेरी' याद यूँ सताये.

सब पास में हों तेरे
तू सबको भूल जाए.
सब दें तुझे दिलासा
तुझे सब्र ही न आये.

करने को बात मुझसे
तू फोन तो उठाये,
पर जब मुझे मिलाये
नम्बर ही भूल जाए.

तड़पे ओ'मुझसे मिलने
सब छोड़कर तू आये,
चढ़ने को जब तू दौड़े
तेरी ट्रेन छूट जाए!

तब याद मेरी तुझको
कुछ इस तरह रुलाये,
रोती है जैसे विधवा'
कोने में सर टिकाये.

जब चुप कराये कोई
तू और बिलबिलाये,
तुझे याद मेरी आये
और बेहिसाब आये.

ये इल्म भी ज़रूरी
है आना 'प्रिया'आये
कि उम्र भर को कोई
बिछड़ा है तुझसे हाये.

07-08-2018

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