हमें है इल्म ये किरदार ही हिस्से में आ'ना है.
हमारी जा'न जानी है, हमीं को मुस्कुराना है.
नहीं आया जो हमपे आजतक, वो, आजमाना है,
कि किसपे जान देनी है ओ' किससे दिल लगाना है.
वो ही जो प्यार से झां'से में लेकर बेच देता है,
उसी से कह रहे हैं हम कि ते'रा प्यार पाना है!
नहीं है दोष पर, कह दूँ तो दुनिया नोच डालेगी,
कि हमको माहवारी है, ख़ुदा के घर भी जाना है.
यही है गीत 'प्रिया' लिख के जिसको हम बड़ा रोये,
ओ' हँसकर कह रहे हैं सब, यही फिर से सुनाना है.
11-08-2018
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