न कोई ख़्वाहिश न ख़ाब कोई
मैं बस किसी की तला'श में हूँ.
वही जो मुझमें है आधा-आधा
है, को'ई दूजा या मैं-ही-मैं हूँ.
बड़ी ही बेकल है सांस, शायद
जो मिट न पाई वो प्यास मैं हूँ!
मुझे भी बतला दो ऐ ज़हीनों
कि मैं हूँ ज़िंदा या लाश मैं हूँ?
कुचल ही जाना है भाग्य मेरा
हां वो ही शायद, पलाश मैं हूँ!
किसी तरसते को जाके दे दो.
भरा हुआ एक गिलास मैं हूँ!
1 oct
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