For Dr. APJ Abdul kalam.........
मैंने शब्दों को ढूँढा,
पर वो जाने कहाँ गायब हैं,
हर तरफ़ नज़र दौड़ा रही हूँ,
तो तुम्हारी ही तस्वीरें लगी हैं..
बीच की मांग निकाले, दो लटों को माथे पे डाले, और मुस्कुराते...
सब तुम्हें याद कर रहे हैं....
पर मुझे तो तुम हमेशा ही याद रहते हो...
मैं तो तुम्हें श्रद्धाजंलि भी नहीं दे पाऊँगी..
क्योंकि वो तो मैं उन लोगों को देती हूँ , जो मेरे जीवन और ज़ेहन में मृत होते हैं...
मेरी आँखों में देखो ...
ओ मेरे सबसे प्रिय वैज्ञानिक...
तुम मेरी अंतिम सांस तक ज़िंदा हो..
ओ दुनिया के सबसे सरल प्राणी...
तुम यहीं हो, मेरे एकदम करीब...
ओ ख़ुशी और प्रेरणा के झरने
ओ मेरे कलाम
मेरी आवाज सुनो...
तुम हो...
सबके सवालों का जवाब देने वाले
बस इतना बताओ..
___ कि आज मेरा गला क्यों रुंध रहा है?...
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