गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना,
सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Sunday, November 1, 2015
मित्र ! तुम जो निकले हो सफ़र पे तोे बिना कुछ बूझे चलो और चलते चलो, हां,पर जहां दौड़ती भीड़ में, हर चेहरा तुम्हारे जैसा लगे और हर दिल किसी दूर के ग्रह से आया ठूँठ अजनबी तो समझ जाना तुम ' दिल्ली' में हो......
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