Sunday, November 1, 2015

जाय बसे वृन्दावन में ख़ुद
और हमें दिल्ली पहुंचाए
मौज करी यमुना तट पे
नित गोपियों के संग रास रचाये
राधा का नाम जपे दुनिया
ख़ुद रुक्मिणी के संग फेरे लगाये
जाओ लला बड़ी भूल भई
हम मूरख तुम्हें पहचान न पाये..

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