गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना,
सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Sunday, November 1, 2015
जब से दिल, जां, दुनिया के सितम हम सहना सीख गए.. सब हंसी मिटी बातें भी गयीं चुप रहना सीख गए.. मौजों से कहो उड़ जाएं कि अब गुम रहना सीख गए.. सावन से कहो आँखों से बरस हम बहना सीख गए......!!!!!!
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