Friday, January 2, 2015

तुम इश्क कहोगे, हम राख कहेंगे
तुम हुस्न कहोगे हम खाक कहेंगे।।

तुम राम हो उपवन हो फूलों से सजे झूमो
मैं कृष्ण घना जंगल यही बात कहेंगे ।।

तुम मधुर-मधुर, हम क्षार क्षार
तुम सुर्ख मिलन, हम इंतजार
तुम लौ अखंड, हम अंधकार
तुम आनंदवन, हम उजड़े थार
तुम तीर-ए-नजर, हम आर पार
तुम चैन-ओ-सुकूं, हम बेकरार
तुम अभयदान, हम तड़ीपार ।।

तुम रंग हंसों, फूल खिलो
जींस्त जियो जान-ए-जहां
हम डूब के सहरा में
इंकलाब करेंगे।।

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