Friday, January 2, 2015

जब कोई ह्रदय वृंदावन हो जाए...................

फिर आइये, चाहे जाइये
या घर बना बस जाइये....

चाहे ब्रज की ठंडी रेत में
मदमस्त लोट लगाइए,
या ठोकरें देकर जमीं को
धूल-धूल उड़ाइए..

चाहे रख जटा घनघोर
भीषण तप या धूनि रमाइए
चाहे हाथ ले संतूर
दर-दर कृष्ण-राधे गाइए..

चाहे बैठ मीठे कंठ से
फिर प्रेम राग सुनाइए
या लेके तबला द्रुत गति में
तीन ताल बजाइए

चाहे मानकर उपवन मनोरम
फूल-शाक उगाइए
या जानकर शमशान नित
लाशें यहां दफनाइए

चाहे जग भलाई के लिए
कूए-बावड़ी खुदवाइए
चाहे खोद-खोद जमीन, पीपल
नीम, वट लगवाइए

चाहे आए दीवाली तो जगमग
घी के दीप जलाइए
या फाग गा होली पै
भर-भर रंग-गुलाल उड़ाइए......

कि कोई असर नहीं
..............जब कोई ह्रदय वृंदावन हो जाए.......









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