जब तुम आओगे प्रीतम...
तुम्हारे बदन की गंध को भर लूंगी सांसों में
तुम्हारी छुअन को चिपका लूंगी होठाें पर
और आंखों की पुतलियों पर मढ़कर तुम्हारी तस्वीर
भींच लूंगी जोर से पलकों को...।।
बस तुम आ जाओ प्रीतम...।।
--------- किसी देवी के अनुरोध पर किसी देवता के लिए लिखी थीं..
तुम्हारे बदन की गंध को भर लूंगी सांसों में
तुम्हारी छुअन को चिपका लूंगी होठाें पर
और आंखों की पुतलियों पर मढ़कर तुम्हारी तस्वीर
भींच लूंगी जोर से पलकों को...।।
बस तुम आ जाओ प्रीतम...।।
--------- किसी देवी के अनुरोध पर किसी देवता के लिए लिखी थीं..
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