Tuesday, July 29, 2014

गीत
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मैं खुले आसमां का पंछी
मैं नीला मुक्त समंदर हूं
मैं मस्त हवा का झोंका हूं,
ना बाहर हूं ना अंदर हूं...
ना जान सका कोई मुझको
जंतर-मंतर छूमंतर हूं
मौजें ही मेरी मस्ती हैं
मैं पागल मस्त कलंदर हूं...।।

मैं बेफिकरा, मैं बेफिकरा,मैं बेफिकरा हुआ,
मैं मस्त फकीरों का दिकरा, मैं बेफिकरा हुआ...।।

मैं मधुर तान पै बंसी की बस राग मुहोब्बत गाता हूं,
बुझ चुके दिलों में मीठा सा,मैं प्यार का दर्द जगाता हूं..
ले हाथ खिलौना सारंगी, बस प्यार-प्यार चिल्लाता हूं
कोने-कोने भटका फिरता, फिर बात यही दोहराता हूं..
मैं हीर और रांझे का जिकरा ...
मैं बेफिकरा हुआ.....

ना दुनिया की परवाह मुझे, अपनी मस्ती में रहता हूं..
जग अल्लाह-अल्‍लाह कहता है, मैं प्रीतम-प्रीतम जपता हूं..
मैं प्रीत के खेल का बाजीगर, दिल की बस्ती में बसता हूं
मैं आंखों की भाषा कहता, ना बात जुवां से करता हूं..
जग लाख कसे मुझपै फिकरा..
मैं बेफिकरा हुआ....।।

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