Monday, June 16, 2014

भजन
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राधे जू के नाम की
रटना लई लगाय
श्री चरणों में प्रेम का
दीपक दिया जलाय
तज आई संसार, सिर
दर पै दिया झुकाय
लाज रखौ चाहे छोड़ दो
या दो दीप बुझाय.......।।

मेरी अरज सुनो राधे
मेरी विनती सुनो राधे
मेरी प्राणप्रिये राधे
मेरी कृष्‍णप्रिये राधे

हम द्वार तुम्हारे बैठे हैं
यह सोच हिया मुस्काय रहा..
दृग में छवि स्वामिन की भर के
मन राधे जू राधे जू गाय रहा
मोहे दरस तो दो राधे....मेरी ओर तको राधे.....।।

मैं प्रीत की चाह में भटक रही
मोहे प्रेम का राग सुना दीजै
मैं नीर रहित सूखी बदरी
निज नेह का नीर बहा दीजै
मेेरे हिए बसो राधे......मुझे प्रेम करो राधे.......।।।

हम शरण तुम्हारी आ पहुंचे
अब तन मन की परवाह नहीं
तुम माफ करो या प्राण हरो
मुख से निकलेगी आह नहीं
मुझे यूं न तजो राधे.......मेरी बात सुनो राधे......।।
 

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