भजन
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तुम लाख न दो दर्शन हमको
अपने दर से महरूम रखो
चाहे दुनिया में लाके हमको
इन श्री चरणों से दूर रखो
पर सुन लो मेरे रघुराई
प्रीतम मेेेरे गाेविंद मेरे...
मन में विश्वास घनेरा है
मैं तेरा हूं तू मेरा है....
ये रात भी छंटने वाली है
आएगा जल्द सबेरा है....
तू मेरा मेरा मेरा है....
मैं तेरा हूं तू मेरा है...।।
दुनिया में मझे क्यों जन्म दिया
क्यों नाम दिया क्यों काम दिया
धन माया मोह के आडंबर में
फैंक मुझे गुमनाम किया
मैं पापी बन भटका फिरता
जीवन भी गर्क तमाम किया..
जिस परमपिता का अंश था मैं
उस नाम को भी बदनाम किया..
छाया घनघोर अंधेरा है...................मैं तेरा हूं तू......।।।
तुमने मुझको छोड़ा क्यों था
मुझसे प्रभु मुंह मोड़ा क्यों था..
इस नश्वर देह को देकर के
मन से रिश्ता तोड़ा क्यों था..
तुमने ही मुझे डुबोया है
अब तुम ही मुझे उबारोगे
जो बिखर चुकी है रूह मेरी
अब तुम ही उसे संवारोगे
तोडो ये सांस का घेरा है............मैं तेरा हूं तू.............।।
तु हो न हो हासिल मुझे
है हक तेरा मरजी तेरी...
पर मैं हुआ धनवान
तेरा नाम मेरे पास है.....।।
तेरी आस में मेरे गिरधारी
दुनिया को तज आया हूं मैं
छोड़े झूठे सब आभूषण
मस्तक ब्रज रज पाया हूं मैं
मेरे मन के प्रीत समंदर का
नंदलाल किनारा तुम ही हो
मझधार के बीच फंसे तृण का
एकमात्र सहारा तुम ही हो...
तेरे चरण ही मेरा डेरा है......मैं तेरा हूं तू .........।।
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मैं सोच रहा बैठा बैठा
नित स्वप्न मैं यही मनाता हूं
इक बार मिले अवसर मुझको
बस आस मैं यही लगाता हूं
हे मेरे प्रभु मौका दो मुझे
आज मैं तुमको सजाऊंगा
राधा जैसा श्रंगार करूं
तुम्हें मोहिनी रूप बनाऊंगा.......
तम की कारोंच खुरचकर के
तुम्हें काजल आज लगाऊंगा
सूरज से उजाला लेकर के
बिंदिया में उसे सजाऊंगा
पेडों से चुनुंगा हरियाली
चुनरी हरियल पहनाऊंगा
फूलों से लेकर मधुर रंग
तुम्हें लाली लाल लगाऊंगा
मेरी तो आस लगी तुमसे...यूं ही बीते सांझ सबेरा है....
मैं तेरा हूं तू मेरा है.....।।
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तुम लाख न दो दर्शन हमको
अपने दर से महरूम रखो
चाहे दुनिया में लाके हमको
इन श्री चरणों से दूर रखो
पर सुन लो मेरे रघुराई
प्रीतम मेेेरे गाेविंद मेरे...
मन में विश्वास घनेरा है
मैं तेरा हूं तू मेरा है....
ये रात भी छंटने वाली है
आएगा जल्द सबेरा है....
तू मेरा मेरा मेरा है....
मैं तेरा हूं तू मेरा है...।।
दुनिया में मझे क्यों जन्म दिया
क्यों नाम दिया क्यों काम दिया
धन माया मोह के आडंबर में
फैंक मुझे गुमनाम किया
मैं पापी बन भटका फिरता
जीवन भी गर्क तमाम किया..
जिस परमपिता का अंश था मैं
उस नाम को भी बदनाम किया..
छाया घनघोर अंधेरा है...................मैं तेरा हूं तू......।।।
तुमने मुझको छोड़ा क्यों था
मुझसे प्रभु मुंह मोड़ा क्यों था..
इस नश्वर देह को देकर के
मन से रिश्ता तोड़ा क्यों था..
तुमने ही मुझे डुबोया है
अब तुम ही मुझे उबारोगे
जो बिखर चुकी है रूह मेरी
अब तुम ही उसे संवारोगे
तोडो ये सांस का घेरा है............मैं तेरा हूं तू.............।।
तु हो न हो हासिल मुझे
है हक तेरा मरजी तेरी...
पर मैं हुआ धनवान
तेरा नाम मेरे पास है.....।।
तेरी आस में मेरे गिरधारी
दुनिया को तज आया हूं मैं
छोड़े झूठे सब आभूषण
मस्तक ब्रज रज पाया हूं मैं
मेरे मन के प्रीत समंदर का
नंदलाल किनारा तुम ही हो
मझधार के बीच फंसे तृण का
एकमात्र सहारा तुम ही हो...
तेरे चरण ही मेरा डेरा है......मैं तेरा हूं तू .........।।
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मैं सोच रहा बैठा बैठा
नित स्वप्न मैं यही मनाता हूं
इक बार मिले अवसर मुझको
बस आस मैं यही लगाता हूं
हे मेरे प्रभु मौका दो मुझे
आज मैं तुमको सजाऊंगा
राधा जैसा श्रंगार करूं
तुम्हें मोहिनी रूप बनाऊंगा.......
तम की कारोंच खुरचकर के
तुम्हें काजल आज लगाऊंगा
सूरज से उजाला लेकर के
बिंदिया में उसे सजाऊंगा
पेडों से चुनुंगा हरियाली
चुनरी हरियल पहनाऊंगा
फूलों से लेकर मधुर रंग
तुम्हें लाली लाल लगाऊंगा
मेरी तो आस लगी तुमसे...यूं ही बीते सांझ सबेरा है....
मैं तेरा हूं तू मेरा है.....।।
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