Monday, July 16, 2012

वो मां है मेरी 


कोई हस्ती नहीं, ना चमत्कार है,
वो तो बस सीधी-साधी सी मां है मेरी।

काम करते हुए, मन में मेरे लिए,
हर बखत बुदबुदाए वो मां है मेरी।


बिछड़कर उससे रोऊं तो डांटे मुझे,
खुद तो दिल में ही रो ले वो मां है मेरी।

अपने सपनों को जी तो रही हूं मैं पर ,
याद रह-रह के आए वो मां है मेरी।

सांस खींचू या छोडूं हो आहट उसे,
मेरे हर दम में बसती वो मां है मेरी।

 भूल के फिक्र बिल की वो घंटो मुझे
फोन पर जीना सिखलाती मां है मेरी।

गर खफा हो भी जाए वो मुझसे कभी
बस लिपटकर मना लूं वो मां है मेरी।

मुझको बनना नहीं कोई व्यक्त‌ि महान,
मैं तो बन जाऊं बस जैसी मां है मेरी।

जन्नतों की जगह हर जनम में खुदा,
हाथ फैला के मांगू वो मां है मेरी।।










 

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