Friday, July 13, 2012

बहुत सुखद है.............
 
यूं तरसते लोगों की उम्मीदों को धता बताना,
एक झलक दिखलाकर, फिर तुम्हारा कहीं छुप जाना।

हाय,गलत घोषणाऔं पर मौसम विभाग की किरकिरी कराना,
फिर मायूस चैहरों पर तरस खाकर, इसका झमाझम बरस जाना।

रात की इस यकायक में चमचमाती कारों का यूं जाम में फंस जाना,
पैदल शहंशाहों का मुस्कुराकर चिढ़ाते हुए कारों के बीच से निकल जाना।

मेह में लिपटी कीचड़ में यूं अचानक पैर का धंस जाना,
ओह -सिट... कहकर मोहतरमाओं का फिर जोर से चिल्लाना।

कुछ खिदमतगारों का रूमानी फिजा में घर में चाय और पकोड़े उड़ाना,
तो कुछ का उजड़ते घर को समेटने में ही सावन का बीत जाना।

बखूबी जानती हूं मैं कि अलग-अलग होता है सबकी जिंदगी का फसाना,
पर एक बार महसूस तो करो बहुत-बहुत सुखद है हर बार सावन का आना।

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