बातें जो तुमसे कही गई पर तुमने सुनी नहीं............
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1...ओ प्रिय..
आओ....
मैंने बिछा दी है गोद अपनी..
इसमें रखाे सिर अपना...
ओढ लो मुझको...और सो जाओ...
2....आज मेरा मन है कि बद्तमीज हो जाऊं....
और घायल कर दूं तुम्हारे होठों को अपने होठों से....।।
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1...ओ प्रिय..
आओ....
मैंने बिछा दी है गोद अपनी..
इसमें रखाे सिर अपना...
ओढ लो मुझको...और सो जाओ...
2....आज मेरा मन है कि बद्तमीज हो जाऊं....
और घायल कर दूं तुम्हारे होठों को अपने होठों से....।।
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