जलते रहो
गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना, सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Thursday, December 13, 2012
अपने दुखों को गर्मजोशी से मनाती रही इस उम्मीद में.................
कि शायद इक दिन शायर हो जाऊं.....।।
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