जलते रहो
गर बुझी यह आग तो मुमकिन नहीं फिर से जलाना, सर्द पड़ जाने से पहले जल उठो,जलते रहो।।
Monday, December 31, 2012
किसको कोसूं और किस-किससे कहूं.....
जब रोज फूट जाता है मेरी कल्पनाओं का गुबार।।
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